Sunday, 26 February 2017

"वो छोड़ जायेंगे"


                                                                   "वो छोड़ जायेंगे"       



रात -दिन जलता हूँ ,मोमबत्ती की तरह
आंस भर रोता हूँ ,सावन की बारिश की तरह

बूंदों में मिलें हैं ,ख़ुशियों और दुःख के अंश
दुःख तो देता है साथ ,दोस्तों की तरह
खुशियां ख़ारिज करतीं हैं  मुझे,काफ़िरों की तरह ,

फूल भी लगतें मुझको ,काँटों की तरह
चुभते हैं, सर से पाँव तलक मेरे,

कुछ रूक कर ,कुछ निकालने की कोशिश है
रोक कर बहते आंसू ,सब भुलाने की कोशिश है ,

पतंगें उड़तीं हैं ,दीपक को पाने को
कुछ पल ही सही ,गले लगाने को
न जाने ये ,कैसी अधूरी चाहत है
मौत को प्यार से ,गले लगाने को ,

दौड़तीं हैं लहरें ,समंदर की
कुछ पल ही सही ,किनारों को पाने में
जानता हूँ ,वो छोड़ जायेंगे मुझको रोता हुआ
ज़ालिम इस ज़माने में।


                                "एकलव्य"                    


छाया चित्र स्रोत:  https://pixabay.com 
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